होगी कभी तो एक दिन खुशियाँ भी मेरे साथ
ये सोच के मै सब कुछ भुलाता चाला गया
ये शाम जो ढली तो सवेरा भी आयेगा
ये सोच के मै खुशियाँ मनाता चला गया
सारा जहाँ है मेरा और मै हूँ इस जहाँ का
बस दिल से दिल सभी का मिलाता चला गया
कुदरत ने क्या दिखाया करमात ज़िन्दगी मे
आशिक़ी बना के मुझ को रुलाता चला गया
चाहा था बताने को दास्तान ज़िन्दगी का
कोई रो रो के अपनी हालात सुनाता चला गया
मैखाने जा के देखा रोते हुये लोगो को
हंस हंस के यही बात बताता चला गया
मेहफिल भी अजनभी थी हर शक्स की तरह
ये सोच के मै खुद को हंसाता चला गया |